10 अक्टूबर को करवा चौथ का पूजन मुहूर्त और कथा सुनने का मुहूर्त शाम 5 बजकर 57 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा, इस दिन व्रत का समय सुबह 6 बजकर 19 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा.
करवा चौथ के दिन चंद्रोदय का समय- रात 8 बजकर 13 मिनट रहेगा.
करवा चौथ मे क्या होती है गलतियां
- अन्न ग्रहण न करें
करवा चौथ के व्रत की शुरुआत सुबह की सरगी से होती है और इस व्रत का पारण सिर्फ चांद देखने के बाद ही किया जाता है. इस दौरान पानी की एक बूंद भी नहीं पी जाती है और अगर कोई महिला इस व्रत के दौरान गलती से पानी या भोजन खा लेती है, तो उसका व्रत टूट जाता है.
- चंद्रोदय से पहले व्रत तोड़ना
करवा चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा माना जाता है. अगर किसी कारणवश आप चंद्रोदय से पहले व्रत तोड़ते हैं, तो आपको कोई लाभ नहीं मिलेगा.
- इन कार्यों को करने से बचें
इस दिन सुई, कैंची या चाकू जैसी नुकीली या धारदार वस्तुओं का उपयोग न करें. माना जाता है कि ऐसा करने से व्रत का फल कम हो जाता है.
- दिन में सोना
करवा चौथ के व्रत के दौरान दोपहर या दिन में सोने से बचना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, दिन में इस दिन सोना वर्जित माना जाता है क्योंकि ऐसा करने से व्रत का फल नष्ट हो जाता है.
- सुहाग की वस्तुओं का दान
करवा चौथ पर सुहागिन महिलाओं के लिए सुहाग की वस्तुओं का दान करना बहुत शुभ माना जाता है. लेकिन ध्यान रहे कि आप गलती से भी अपनी सुहाग की वस्तुओं का दान न करें. ऐसा करना भी अशुभ माना जाता है.
करवा चौथ की पूजन विधी
सबसे पहले सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा होती है, जो सास अपनी बहू को देती हैं. दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को करवा चौथ की पूजा की जाती है. इसके लिए एक थाली सजाई जाती है जिसमें करवा (मिट्टी का घड़ा), दीपक, चावल, मिठाई, पानी और रोली रखी जाती है. महिलाएं सोलह श्रृंगार करके एक साथ बैठकर कथा सुनती हैं.
कथा सुनने के बाद महिलाएं करवा और मिट्टी के दीये से पूजा करती हैं. करवा को पानी, मिठाई और दक्षिणा चढ़ाई जाती है. उसके बाद चांद निकलने का इंतजार किया जाता है. चांद को छलनी से देखकर अर्घ्य दिया जाता है और फिर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोला जाता है.
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