वाराणसी| काशी विद्या, विद्वत्ता व सर्वधर्म की राजधानी है। आज समाज का स्वरूप ठीक नहीं चल रहा है। हर चेहरा परेशान व मन घूटन में है।हम धर्म से कट कर है जबकि समाज में हमें पोषक की भूमिका में रहना चाहिए तभी हमारी व समाज की प्रासंगिकता होगी। और यह हमें रामचरितमानस के मनन से ही मिल सकता है। उक्त विचार संकटमोचन मंदिर के महंत विश्वंभर नाथ मिश्र के हैं।जो वे आज तुलसी घाट पर आयोजित दो दिवसीय तुलसी जयंती समारोह में प्रस्तावना पर व्यक्त की। पंडित देवव्रत चौबे ने कहा कि रामचरित मानस शिव के मन में था जिनका मन स्वयं मंगल स्वरूप है।
मानस सज्जनों व असज्जनों दोनों का कल्याण करने वाला है। प्रो कौशल किशोर मिश्र ने कहा कि तुलसी जयंती राष्ट्रीय पर्व के रूप मनाया जाना चाहिए यह सभी विद्यालय, विश्वविद्यालयों में मनाया जाना चाहिए। पद्मश्री आचार्य राजेश्वर विद्वान सदाशिव द्रिवेदी ने कहा कि मानस संपूर्ण विश्व का कल्याण करने वाला है। पंडित राम अवतार पांडे एडवोकेट ने कहा कि आज हम अपनी संस्कृति मर्यादा सिद्धांतों से कटते जा रहे हैं। इन सभी समस्याओं का समाधान मानस के ग्रंथों में निहित है। पण्डित शिव पूजन शास्त्री ने कहां की मानस में सभी समस्याओं का समाधान है मानस ऐसा ग्रंथ है कि अगर मानव जीवन में उतार ले इस कलयुग में राम राज्य की स्थापना हो सकती है हर सुख प्राप्त हो सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया इस अवसर पर कात्यायन द्वारा तुलसी दास के पद गाइए गणपति जगवंदन संगीतमय गान से किया। वक्ताओं का माल्यार्पण राजेश दीक्षित ने किया। इसके पूर्व प्रातः काल 9:00 बजे प्रोफेसर विशंभर नाथ मिश्रा मैं तुलसी मंदिर में गोस्वामी तुलसीदास जी के चित्र पर माल्यार्पण कर विधि विधान से पूजन अर्चन किया ।इस अवसर अजय राय नवल किशोर मिश्रा उपेन्द्र पांडेय,रामयश म8श्र, अशोक पाण्डेय विनय पांडे संदीप पांडे सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। संचालन श्रीनिवास पांडेय ने किया। लोगों में प्रसाद वितरण महंत विश्वंभर नाथ मिश्र ने किया।
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