वाराणसी. UP Budget 2022: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में गुरुवार को सदन में वित्तमंत्री सुरेंद्र खन्ना ने 2022-23 के लिए बजट पेश किया। इसमें बनारस और गोरखपुर में मेट्रो रेल चलाने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया है। यानी एक बार फिर से बनारस में मेट्रो रेल चलाने की कवायद शुरू हो गई है। बता दें कि इससे पहले 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बनारस में मेट्रो रेल चलाने की प्रक्रिया शुरू की थी। सब कुछ तैयार भी हो गया था। लेकिन योजना मूर्त रूप ले इससे पहले सरकार चली गई और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। फिर रोपवे की कवायद शुरू हुई थी। लेकिन आज पुनः मेट्रो रेल के लिए बजट का प्रावधान किया गया है।
पूर्व सीएम अखिलेश का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा बनारस में मेट्रो रेल
बता दें कि वाराणसी में मेट्रो रेल लाइन बिछाना पूर्व मुख्य मंत्री अखिलेश यादव का सपना था। इसके लिए उन्होंने सारी कवायद पूरी की। राइट्स कंपनी को डीपीआर बनाने का काम सौंपा। कंपनी ने 29 जून 2016 को वाराणसी के मेट्रो रेल का डीपीआर तैयार किया। डीपीआर शासन को सुपुर्द कर दिया गया। कुल 15,000 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए पूर्व सीएम अखिलेश ने मेट्रो मैन श्रीधरन को वाराणसी भेजा। श्रीधरन ने राइट्स के डीपीआर को देखने के साथ ही उन सभी स्थलों का निरीक्षण भी किया जहां स्टेशन बनाए जाने थे या जिन-जिन मार्गों से मेट्रो रेल लाइन को गुजरना था। सूक्ष्म अध्ययन के बाद श्रीधरन ने मीडिया को बताया था कि मुश्किल तो है काशी में मेट्रो रेल दौड़ाना मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं। काम होगा और चार साल में एक कॉरीडोर तो छह साल में दोनों कॉरीडोर का काम पूरा हो जाएगा।
ये रूट तय किए गए थे
-मेट्रो रेल के लिए दो रूट तय किए गए थे।
-एक बीएचयू से भेल होते शिवपुर तो दूसरा बेनियाबाग से सारनाथ तक।
-दोनों को मिला कर कुल लंबाई 29.3 किलोमीटर थी जबकि भूमिगत लाइन 23 किलोमीटर।
-बीएचयू से भेल की लंबाई 19.33 किलोमीटर थी।
-15.5 किलोमीटर भूमिगत शेष शिरोपरि।
-इस रूट पर 17 स्टेशन प्रस्तावित थे।
-दूसरे बेनिया से सारनाथ के बीच 9.88 किलोमीटर लंबी लाइन प्रस्तावित थी।
-इस रूट पर 8.33 किलोमीटर मेट्रो लाइन भूमिगत थी। इस रूट पर कुल नौ स्टेशन प्रस्तावित किए गए थे।
- कुल 26 स्टेशन बनाने का प्रस्ताव था।
-परियोजना पर 17,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। इसके लिए बेनियाबाग में टर्मिनल प्रस्तावित था तो हरहुआ के गणेशपुर में 14 हेक्टेयर में वर्कशॉप का निर्माण प्रस्तावित था।
80 फीसद लाइन भूमिगत
-पूर्व के प्रस्ताव में कहा गया था कि 80 फीसदी लाइन भूमिगत होगी।
-कंसल्टेंट ने इसके लिए संग्रहालय का नक्शा भी तैयार किया था ताकि प्राचीनतम जीवंत नगरी के अतीत को संग्रहीत किया जा सके।
-वह संग्रहायल ग्रीस के एथेंस मेट्रो स्टेशन की तर्ज पर तैयार किया गया था। धन आवंटन पर जिच, केंद्रीय शहरी मंत्रालय ने प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया था
लेकिन तब केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालाय ने पूरे प्रोजेक्ट को ढंटे बस्ते में डाल दिया। तर्क यह दिया गया था कि 17,000 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की फंडिंग कैसे होगी यही तय नहीं था। मसलन कितनी धनराशि केंद्र देगा कितनी राशि राज्य सरकार वहन करेगी। पूरी परियोजना के लिए किससे लोन लिया जाएगा। यह भी तय नहीं था। इतना ही नहीं केंद्र सरकार ने तब यह अड़ंगा लगाया कि काशी में मेट्रो रेल पर खर्च होने वाली धनराशि बैक कैसे होगी। तब सूत्रों ने बताया था कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय का कहना था कि इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद उसकी रिकवरी नहीं हो पाएगी।
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