श्री अग्रसेन कन्या पी जी कॉलेज में श्री अरविंद के आलोक” विषयक एक दिवसीय गोष्ठी का आयोजन

वाराणसी। श्री अग्रसेन कन्या पी जी कॉलेज वाराणासी के श्री अरविंद अध्ययन केंद्र परमानंदपुर द्वारा सोमवार को श्री अरविंद के 150 वी जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में शिक्षा शास्त्र विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 श्री अरविंद के आलोक” विषयक एक दिवसीय गोष्ठी का आयोजन किया गया,जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में डॉ अपर्णा राय ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्री अरविंद की दृष्टि में नई शिक्षा समग्र शिक्षा है जिसका उद्देश्य है स्वयं को जानना और जीवन में जिज्ञासा का होना, सदैव प्रयासरत रहना एवं लक्ष्यों का निर्धारण और उनकी पूर्ति हेतु अग्रसर बने रहना। डॉ. अपर्णा जी ने प्रस्तुत विषय पर विभिन्न लघु कथा के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए। केंद्र की समन्वयक एवं प्राचार्य प्रो.मिथिलेश सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि एक शिक्षक का कार्य है विद्यार्थी को सदैव प्रेरित करना राष्ट्रीय शिक्षा नीति और अरविंद जी की शिक्षा नीति में बहुत सारी समानताएं हैं जो स्वयं में ग्रहणीय है। डॉ निशा पाठक(शिक्षा शास्त्र विभाग) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों से प्रवक्तागण छात्राएं एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के सभी सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन केंद्र की सह – समन्वयक डॉ उषा बालचंदानी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की अध्यक्ष डॉ. अनीता सिंह ने किया।


दूसरी ओर आज महाविद्यालय के बुलानाला परिसर में आज़ादी के अमृत महोत्सव 75 वर्ष के उपलक्ष्य में शूरवीर महाराणा प्रताप की 482वीं जयंती “राष्ट्र नायक के रूप में महाराणा प्रताप का योगदान” विषयक संगोष्ठी के साथ मनाई गई।अमृत महोत्सव कार्यक्रमों के समन्वयक डॉ दुष्यन्त सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन एवं संघर्ष विश्व के इतिहास में अपना एक विशिष्ट महत्व रखता है। डॉ नन्दिनी पटेल ने उनके संघर्ष को याद करते हुए महाराणा प्रताप की जीवनी को प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक पढ़ाये जाने पर बल दिया।डॉ सरला सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप धार्मिक सहिष्णुता और जातीय बंधुता की प्रतिमूर्ति थे। हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।कार्यक्रम का संचालन डॉ श्रृंखला सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ कंचन माला ने किया।इस अवसर पर अनेक प्रवक्तागण व विद्यार्थी मौजूद रहे।

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