वाराणसी| इस कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत के किराना घराने के सुप्रसिद्ध कलाकार पं राघवेंद्र गुडि रहे।उपरोक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. योगेंद्र सिंह, अध्यक्ष, मानविकी संकाय ने की। इस व्याख्यान में पं राघवेंद्र ने मंचकला विभाग के विद्यार्थियों को किराना घराने की विशिष्टता से अवगत कराते हुए यह बताया कि गायकी में कोमलता विशेष रूप से इस घराने में प्रयोग होता है। स्वरों का लगाव ऐसा होता है जिसमें नाभि से आवाज उत्पन्न होती है। गायकी में आलाप, तान, गमक, खटका, मुर्की आदि का प्रयोग किराना घराने के शैली से लाभान्वित एवं ज्ञानवर्धन किया।
पं राघवेंद्र ने सभी विद्यार्थियों को किराना घराने के इतिहास बताते हुए बड़े बड़े कलाकारों जैसे भारतरत्न भीमसेन जोशी, अब्दुल करीम खां, प्रभा अत्रे, हीराबाई बड़ोदकर आदि के संगीत के समर्पण को समझाते हुए गुरु शिष्य परंपरा के महत्व को समझाया। आखिर में राग मुल्तानी में निबद्ध बंदिश “नैनन में आन बान” एकताल द्रुतलय में प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर संगत सुमंत कुमार ने किया। कार्यक्रम का समापन विभाग प्रभारी डॉ संगीता घोष द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से किया गया। इस कार्यक्रम का सफल संचालन विनोद कुमार द्वारा किया गया।
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