गेहूं बीज उत्पादन तकनीक पर व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

रिपोर्ट – सत्यम साहनी

खजुरी /मिर्ज़ामुराद। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, कल्लीपुर, वाराणसी में गेहूँ बीज उत्पादन तकनीक विषय पर पाँच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक /अध्यक्ष डॉ नरेंद्र रघुवंशी के निर्देशन मे आज संपन्न हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार सिंह ने बीज उत्पादन कार्यक्रम लेने वाले कृषकों को राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम, कृषि विश्वविद्यालय या मान्यता प्राप्त संस्थान के वितरण केन्द्रों से बीज उत्पादन हेतु आधार या प्रमाणित श्रेणी का बीज क्रय करना होता है, एवं फसल का राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था में पंजीकरण कराने हेतु निर्धारित शुल्क समय सीमा में जमा करना होता है। पंजीयन हेतु आवेदन पात्र के साथ बीज क्रय किये गए संस्थान से कैश मेमो तथा टैग आदि संलग्न करना आवश्यक है। केन्द्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ. अमितेश सिंह ने बताया कि गेहूँ का प्रमाणित बीज अनुवांशिक एवं भौतिक रूप से शुद्ध होते है, तथा इन पौधों में एकरूपता, गुणों में समानता एवं पकने की अवधि एक पाई जाती है। बीज की अंकुरण क्षमता मानकों के अनुरूप होती है। बीज की जीवन क्षमता उत्तम होती है। तथा पुष्ट भरा एवं चमकदार होता है। प्रमाणित बीज के उपयोग से सामान्य बीज की अपेक्षा उत्पादन में लगभग 15 प्रतिशत तक वृद्धि होती है। ऐसा बीज जो भारत सरकार द्वारा निर्धारित भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानकों की पालन करते हुए राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा प्रमाणित किये जाते है। बीज तकनीकी वैज्ञानिक श्रीप्रकाश सिंह ने बताया की बीज प्रमाणीकरण के लिए गेहूँ की फसल उगाते समय प्रत्येक उत्पादक कृषक के लिए यह आवश्यक है :
खेत में बोई गयी गेहूँ की फसल एक ही किस्म की हो। मिश्रित खेती स्वीकृत नहीं होती है। खेत में एक ही श्रेणी तथा एक ही वंशानुगत पीढ़ी का बीज बोया गया हो।
पूरे खेत में फसल की आयु एवं बाढ़ समान हो। अन्य खाद्यान फसलों अथवा किस्मों के क्षेत्र के बीज बिर्धरित मानक अनुसार पर्याप्त पृथककरण दूरी पर बोई गयी हो।
गेहूँ की फसल को यथासंभव खरपतवार, रोग एवं कीटों से सुरक्षित रखें। अन्य बातें जो बीज के स्तर पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं, उनका हर संभव निराकरण करने का प्रयास करें ताकि बीज वांछित गुणवत्तापूर्ण स्तर का प्राप्त हो सके। फसलों के पुष्पन अथवा कटाई पूर्व, खरपतवार एवं विभिन्न पौधों को खेत से पृथ्यक करना आवश्यक है। इस अवसर पर केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक वैज्ञानिक डॉ. मनीष पाण्डेय, गृह वैज्ञानिक ड़ॉ प्रतीक्षा सिंह, प्रक्षेत्र प्रबंधक राणा पियूष सिंह, अरविन्द गौतम इत्यादि उपस्थित रहे।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *