क्षय रोगियों की पहचान के लिए घर-घर जा रही आशा कार्यकर्ता

क्षय उन्मूलन

  • ग्रामीण क्षेत्र के 182 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से खोजे जा रहे टीबी मरीज
  • दो सप्ताह से अधिक बुखार, खांसी, वजन कम होना आदि लक्षणों से प्रभावित लोगों की करेंगी स्क्रीनिंग

वाराणसी| जनपद को क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) को व्यापक रूप दिया जा रहा है। इस क्रम में ब्लॉक के सुदूर क्षेत्रों में बने आयुष्मान भारत हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर के माध्यम से हर व्यक्ति तक क्षय रोग संबधी सेवाएं पहुंचाई जाएगी। इसके लिए एक निरंतर अभियान चलाया जा रहा है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर के सभी कम्युनिटी हेल्थ आफिसर (सीएचओ) को निर्देशित किया है। उन्होने कहा कि जनपद के क्रियाशील 182 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से आशा कार्यकर्ता घर-घर भ्रमण कर क्षय रोग के संभावित लक्षणों की पहचान की जा रही है। क्षयरोगियों को खोजने के लिए निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनपद के सभी स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्साधिकारियों को अपनी ओपीडी के 10 प्रतिशत मरीजों की बलगम जांच के लिए रेफर करने का निर्देश दिया है जिससे कि लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त किया जा सके।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ पीयूष राय ने बताया कि किसी को दो सप्ताह से अधिक समय तक बुखार/खांसी होना, वजन कम होना, भूख न लगना, रात में पसीना आना, आदि लक्षण वाले लोगों के बलगम में खून आने के लक्षण के आधार पर हर व्यक्ति की स्क्रीनिंग हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर की जाएगी। स्क्रीनिंग के बाद ऐसे लोगों की माइक्रोस्कोप जांच, सीबीनाट और ट्रूनाट जांच कराई जाएगी। जांच में क्षय रोग से प्रभावित पाए जाने पर उनका तत्काल इलाज शुरू किया जाएगा। इसके लिए बुधवार को सभी सीएचओ और बीसीपीएम को डिप्टी डीटीओ डॉ अमित सिंह, डीपीसी संजय चौधरी, डीपीपीएमसी नमन गुप्ता, डीपीटीसी विनय मिश्रा ने प्रशिक्षण दिया ।
इस साल अब तक मिले 9490 टीबी मरीज –
डीटीओ ने बताया कि साल 2021 में 7438 (106%) टीबी मरीज सरकारी अस्पतालों एवं 5054 (72%) निजी चिकित्सालयों व संस्थानों में नोटिफ़ाई किए गए। इस साल जनवरी से अब तक करीब 9490 टीबी मरीजों को नोटिफ़ाई किया जा चुका है। इसमें से 6349 (95%) सरकारी अस्पतालों एवं 3114 (79%) निजी संस्थानों में नोटिफ़ाई किए गए।
छह माह तक टीबी मरीज को मिलते हैं 500 रुपए प्रति माह – निक्षय पोषण योजना में क्षय उपचाराधीनों के खाते में डीबीटी के माध्यम से प्रति माह 500 रुपये की धनराशि छह माह तक भेजे जाने का प्रावधान है। इसके तहत साल 2020 में कुल 7462 क्षय उपचाराधीनों को 2.06 करोड़ रुपये तथा साल 2021 में 8646 उपचाराधीनों को 2.14 करोड़ की धनराशि का वितरण किया गया। वर्ष 2022 में डीबीटी के माध्यम से अगस्त तक कुल 2.77 लाख रुपये 3904 क्षय रोगियों को निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत भेजा जा चुका है।

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