जिला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्ञानवापी जाने की नही दी अनुमति

वाराणसी।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शिष्य प्रतिनिधिः द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरू संकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज, विद्यामठ केदारघाट वाराणसी द्वारा अपने प्रार्थना-पत्र 2 जून को माध्यम से श्रृंगारगौरी प्रकरण वाद कमीशन दौरान भगवान् आदि विश्वेश्वर शिवलिंग का धार्मिक और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार सनातनी हिन्दू पद्धति के •अनुसार पूजन-अर्चन – राग-भोग अविछिन्न रूप से सतत् होते रहने का उल्लेख करते हुए 4 जून को समय प्रातः 09.00 बजे से भगवान आदि विश्वेश्वर के नियमित/नित्य पूजा अर्चना एवं राग-भोग की अनुमति प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया था। जिसके संबंध में विभिन्न स्रोतों से जानकारी की गयी एवं संबंधित से आख्या प्राप्त की गयी तथा अभिलेखों का अवलोकन किया गया, जिससे विदित हुआ कि आवेदक उपरोक्त द्वारा जिस स्थल पर नियमित / नित्य पूजा अर्चना एवं राग-भोग किये जाने की अनुमति मांगी जा रही है। उस परिसर / स्थल के संबंध में मा0 सर्वोच्च न्यायालय, मा० उच्च न्यायालय, मा जनपदीय न्यायालय, मा० सिविल सीनियर डिविजन के यहाँ वाद विचाराधीन है तथा उक्त स्थल माननीय न्यायालय के आदेश से सील किया गया है तथा सीआरपीएफ की सुरक्षा घेरे में है ।

उपरोक्त वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए शांति / कानून व्यवस्था के दृष्टिकोण से प्रार्थना पत्र को निस्तारित करते हुए उक्त स्थल पर पूजन-अर्चन किये जाने की अनुमति प्रदान न करते हुए संबंधित को संसूचित करा दिया गया है। इसके बावजूद भी यदि कोई कानून का उल्लंघन एवं शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करता है, तो उसके विरूद्ध कठोरतम विधिक कार्यवाही अमल में लायी जाएगी।

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