जानें भारत के किस मंदिर में छिपे हैं चुंबकीय रहस्य, शरीर को खींचती है यहां की शक्तियां

उत्तराखंड जैसे खूबसूरत राज्य से पूरा देश वाकिफ है, बल्कि यहां की कुछ ऐसी जगह हैं, जो विदेशों के लोगों में काफी लोकप्रिय हैं, जैसे ऋषिकेश और हरिद्वार। योग राजधानी के रूप में प्रसिद्ध ऋषिकेश में आप विदेशियों को भी घूमते हुए देख पाएंगे। लेकिन आज हम आपको उत्तराखंड में मौजूद एक ऐसे रहस्यमय मंदिर के बारे में बताने वाले हैं, जहां लोग दूर-दूर से दर्शन करने के लिए आते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं अल्मोड़ा के कसर देवी मंदिर की। ये मंदिर अपने एक अनोखे चुंबकीय चमत्कार से भी लोकप्रिय है, जिसके बारे में जानने के लिए अक्सर यहां वैज्ञानिक भी आते रहते हैं। माना जाता है कि इस चमत्कार के बारे में आजतक कोई भी पता नहीं लगा पाया है। चलिए आज हम आपको कसर मंदिर के बारे में बताते हैं।
कसार देवी का इतिहास –

कसार देवी वो जगह है, जहां स्वामी विवेकानंद भी आए थे, यहां उन्होंने ध्यान किया था, तब से ये जगह और मंदिर हर तरह के यात्रियों के बीच फेमस हो चुकी है। स्वामी विवेकानंद को ये जगह इतनी पसंद आई थी कि उन्होंने अपने लेखन में इसका जिक्र भी किया था। कसार देवी की लोगों में इतनी लोकप्रिय हुई कि यहां बॉब डायलन, जॉर्ज हैरिसन, कैट स्टीवंस, एलन गिन्सबर्ग और टिमोथी लेरी जैसे कुछ प्रसिद्ध व्यक्ति भी आए थे। 70 के दशक में हिप्पी संस्कृति के दशक में ये जगह हिप्पी हिल बन गई थी।

चुंबकीय शक्ति के लिए मशहूर कसार देवी –

कसार देवी मंदिर भारत की देवभूमि के नाम से फेमस उत्तराखंड की अल्मोड़ा पहाड़ियों पर स्थित है। मंदिर के बारे में माना जाता है कि यहां देवी मां साक्षात अवतार में आई थीं। कहते हैं कि भारत की ये एक एकलौती ऐसी जगह है, जहां चुंबकीय शक्तियां मौजूद हैं। मंदिर के आसपास कई जगह हैं, जहां धरती के अंदर बड़े-बड़े भू-चुंबकीय पिंड हैं। आपको बता दें, कसार देवी मंदिर के आसपास का क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है। यहां धरती के अंदर भू-चुंबकीय पिंड है। इस मंदिर से कई शक्तियां जुड़ी हुई हैं, जिसका पता लगाने के लिए यहां नासा के वैज्ञानिक भी आए हैं, लेकिन आखिर में वो खाली हाथ ही लौटे हैं। इस क्षेत्र के आसपास लोगों को मानसिक शांति का अनुभव होगा।

हर साल लगाया जाता है मेला –

अल्मोड़ा में मौजूद कसार देवी मंदिर एक बड़ा ही ऐतिहासिक महत्व रखता है, ये मंदिर फेमस तीर्थ स्थलों में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दौरान कसार मेला लगाया जाता है, जहां हजारों-लाखों लोग शरीख होते हैं। जानकारी के मुताबिक, मेले का महत्व न केवल देश के लोगों में बल्कि विदेशों में भी काफी फैला हुआ है। फोटो साभार

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