लापरवाही से लीवर फेल्योर, सिरोसिस व कैंसर की आशंका
वाराणसी: अनियमित दिनचर्या और जंक फूड से आजकल के लोगों का लीवर फैटी हो रहा है। समय से इलाज न होने से यही लोग लीवर फेल्योर, सिरोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं।
यह कहना है राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में कायचिकित्सा एवं पंचकर्म विभाग के डॉ अजय कुमार का। वह बताते है कि पांच वर्ष पूर्व तक चिकित्सालय में महीने भर में 4-6 फैटी लीवर मरीज आते थे। यही आंकड़ा वर्तमान में 8-10 हो गया है। खास बात यह कि इसमें अधिकांश ऐसे किशोर और युवा होते हैं जो अनियमित दिनचर्या व जंक फ़ूड के आदि होते हैं। डॉ अजय कहते हैं कि लीवर यानी यकृत हमारे खून से हानिकारक पदार्थों को फिल्टर करता है। हम जो भी भोजन करते हैं उससे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और मिनरल्स जैसे पोषक तत्वों को प्रोसेस करने का काम लीवर ही करता है। जब हम फास्ट-फूड, तला हुआ भोजन अधिक करते हैं तो वह लीवर पर अटैक करता है। उसे सही से काम करने से रोकने लगता है। आगे चलकर यही फैटी लीवर का कारण बन जाता है। उन्होंने बताया कि लीवर की कोशिकाओं में अनावश्यक वसा का जमना ही फैटी लीवर होता है। इससे लीवर को स्थायी नुकसान हो सकता है। मुख्य रूप से यह दो प्रकार का होता है। पहला नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर और दूसरा अल्कोहलिक फैटी लीवर।
लक्षण-
शुरू में इस बीमारी का आमतौर पर कोई संकेत नहीं होता है। इसलिए इस रोग का पता काफी देर से चलता है। इन लक्षणों के होने पर फैटी लिवर होने की आशंका हो सकती है-थकान होना, वजन घटना, भूख न लगना, पेट के उपरी हिस्से या बीच में दर्द होना इसके लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा नॉन अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस यानी नैश और सिरोसिस होने पर हथेलियों का लाल होना, पेट में सूजन, त्वचा की सतह के नीचे बढ़ी हुए रक्त वाहिकाएं और त्वचा व आंखों का पीला होना आदि लक्षण दिख सकता है।
उपाय-
अल्कोहल का सेवन बंद करना चाहिए, कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखना चाहिए, चीनी का सेवन कम करे, वजन व ब्लडसुगर को नियंत्रित करे, ज्यादा तलीभुनी-वसायुक्त भोजन से परहेज करे, रोज कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम करें, खाने में ज्यादातर ताजा फल, सब्जियां लें ।
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