कांग्रेस और माउंटबेटेन की मिली भगत से भारत के टुकड़े कर दिए गए – नजमा परवीन

वाराणसी। आज की काली तारीख इतिहास में खून से लथपथ लाशों के साथ दर्ज है, जब जिन्ना के सीधी कार्यवाई के खौफ और माउंटबेटेन की कुटिल चालों के आगे कांग्रेसियों ने नतमस्तक होकर देश के टुकड़े-टुकड़े होने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। इस काले दिन को हम सुभाषवादी कभी नहीं भूल सकते।
परम पावन राष्ट्रदेवता नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के महान आदर्शों पर चलने वाली भारतीय अवाम पार्टी ने लमही के मुंशी प्रेमचन्द स्मृति द्वार से राष्ट्रदेवता सुभाष मंदिर तक मौन जुलूस निकाल कर सवाल किया “भारत विभाजन क्यों ?”
हाथों में काली तख्ती जिस पर सुभाषवादियों का सवाल ख़ूनी लाल से लिखा था। न कोई नारा, न कोई संदेश, बस एक ही सवाल क्यों बांटा हमारे भारत को।
पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष नजमा परवीन के साथ पार्टी के कई मुस्लिम नेताओं ने मौन जुलूस में भाग लिया। जुलूस राष्ट्रदेवता सुभाष मंदिर पहुंचकर सभा में तब्दील हो गयी।
भारतीय अवाम पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष नजमा परवीन ने कहा कि कांग्रेस ने माउंटबेटेन से समझौता कर देश बांट दिया। भारत विभाजन के समय लाखो लोगों का कत्ल कर दिया गया, धार्मिक हिंसा में करोड़ो बेघर हो गए। जिन्ना ने सीधी कार्यवाई की धमकी देकर कत्ल करवा दिया। कोई कांग्रेसी जिन्ना से बात कर हिंसा नहीं रोक पाया, उपर से तुर्रा ये की अहिंसा से आजादी मिल गयी। आजादी केवल परम पवन नेताजी सुभाष की आजाद हिन्द सरकार की वजह से और महान क्रांतिकारियों के बलिदानों से मिली है। लेकिन कांग्रेस ने अपने परिवार के इतिहास को महान बताने के लिए क्रांतिकारियों के बलिदानों को नगण्य कर दिया। देश का विभाजन दुनियां के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी है। हमारे पूर्वजों ने गलती की कांग्रेस का साथ देकर, अब हम फिर से अखण्ड भारत बनायेंगे और खोई हुई भारत भूमि पर तिरंगा फहराएंगे।
मौन जुलूस में ज्ञान प्रकाश, अजय सिंह, अनिल पाण्डेय, ओम प्रकाश पाण्डेय, ओ०पी० सिंह, राजकुमार, पीयूष पाण्डेय, अशोक कुमार विश्वकर्मा, समर बहादुर पटेल, किशन बनवासी, शहाबुद्दीन, फिरोज खान, देवेन्द्र पाण्डेय, पुनीत खोसला, पूजा खोसला, रामचन्द्र यादव, संतोष यादव, अभिमन्यु यादव, विजय कुमार यादव, विनोद कुमार राय, अफरोज, सुनीता श्रीवास्तव, पूनम श्रीवास्तव आदि लोगों ने भाग लिया।

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