होलिका दहन पर आज भद्रा का साया, जानें कितने बजे जलेगी होलिका

होलिका दहन 24 मार्च को किया जाएगा. होली और होलिका दहन से जुड़ी संपूर्ण जानकारी जानने के लिए इस लाइव को फॉलो करें.

होलिका दहन पर करें दरिद्रता दूर करने के उपाय
आज होलिका दहन की रात में पूर्व दिशा की ओर मुंह करके, आसन लगाकर, सात कौड़ियां व एक छोटे शंख को मसूर की दाल की ढेरी पर स्थापित कर लें. इसके बाद मूंगे की माला से ऊँ गं गणपतये नमः. मंत्र का 5 माला जाप करें. मंत्र-जप संपन्न होने पर सभी सामग्री को किसी निर्जन स्थान पर गड्ढा खोदकर दबा दें. इससे आर्थिक तंगी दूर होती है.

नौकरी में प्रमोशन के उपाय
होलिका दहन के दिन कुछ उपाय करने से नौकरी में प्रमोशन के योग बनते हैं. इसके लिए होलिका दहन के समय 8 नींबू लेकर उसे अपने ऊपर से 21 बार उतारें. इसके बाद इसे जलती होलिका में चढ़ा दें. फिर होलिका की 8 परिक्रमा करें. इससे प्रमोशन के योग बनते हैं.

होलिका दहन के दिन दूर करें वास्तु दोष
वास्तु दोष दूर करने के लिए होलिका दहन का दिन अति उत्तम होता है. आज के दिन अपने इष्टदेव को गुलाल अर्पित करें. अपने इष्टदेव का निवास स्थान ईशान कोण में रख कर उनका पूजन करें. यह उपाय करने से ग्रह दोष और वास्तु दोष समाप्त हो जाता है. इससे घर में शांति और सुख-सुविधा आती है.

होलिका में करें अग्नि की पूजा
होलिका दहन से पूर्व अग्निदेव की पूजा का विधान है. अग्निदेव पंचतत्वों में प्रमुख माने जाते हैं. अग्निदेव जीवात्माओं के शरीर में अग्नितत्व के रूप में विराजमान रहते हैं और जीवन भर उनकी रक्षा करते हैं.

लंबी आयु के लिए होलिका में अर्पित करें ये चीज
आप जिसकी लंबी आयु की कामना चाहते हैं उसकी लंबाई के बराबर काला धागा नाप कर दो से तीन बार लपेटकर तोड़ लें. अब इस धागे को होलिका दहन की अग्नि में अर्पित कर दें. मान्यता है कि इससे सारी विपदाएं दूर हो जाती हैं और लंबी आयु का वरदान मिलता है.

होलिका दहन के उपाय
होलिका दहन के समय अग्नि की 7 परिक्रमा करें. देवी लक्ष्मी का ध्यान करते हुए इस पान के पत्ते को होलिका को अर्पित कर दें. माना जाता है कि ऐसा करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. होलिका दहन के समय गेहूं, जौ और चने की हरी बालियां पवित्र अग्नि को समर्पित करनी चाहिए. ऐसा करने से घर में धन का आगमन होता है.

होली की पौराणिक कथा
भक्त प्रह्लाद का जन्म राक्षस परिवार में हुआ था पर वे भगवान विष्णु के बड़े भक्त थे. उनके पिता हिरण्यकश्यप को उनकी ईश्वर भक्ति अच्छी नहीं लगती थी इसलिए हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को अनेकों प्रकार के कष्ट दिए. हिरण्यकश्यप ने कई बार भक्त प्रह्राल को मारने की कोशिश की लेकिन हर बार नकामी ही मिली. तब हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को भक्त प्रह्राद को मारने की जिम्मा सौपा.

होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था. उनकी बुआ होलिका जिसको ऐसा वस्त्र वरदान में मिला हुआ था जिसको पहनकर आग में बैठने से उसे आग नहीं जला सकती थी. होलिका भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए वह वस्त्र पहनकर उन्हें गोद में लेकर आग में बैठ गई. भक्त प्रह्लाद की विष्णु भक्ति के फलस्वरूप होलिका जल गई लेकिन भक्त प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ. इसके प्रथा के चलते हर वर्ष होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है.

भद्रा में नहीं होते शुभ कार्य
पुराणों के अनुसार भद्रा सूर्य की पुत्री और शनि देव की बहन है. भद्रा क्रोधी स्वभाव की मानी गई हैं. मान्यता है कि भद्रा तीनों लोक में भ्रमण करती हैं, जब मृत्यु लोक में होती हैं, तो अनिष्ट करती हैं. भद्रा योग कर्क, सिंह, कुंभ व मीन राशि में चंद्रमा के विचरण पर भद्रा विष्टिकरण का योग होता है. भद्रा काल में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.

होलिका दहन विधि
होलिका दहन का तैयारी कई दिनों पहले से होने लगती है. होलिका दहन वाले स्थान पर लकड़ियां, उपले और अन्य जलाने वाली चीजों को एकत्रित किया जाता है. इसके बाद होलिका दहन के शुभ मुहूर्त पर विधिवत रूप से पूजन करते हुए होलिका में आग लगाई जाती है. इसके बाद होलिका की परिक्रमा करते हुए पूजा सामग्री को होलिका में डाला जाता है.

होलिका दहन की पूजा सामग्री
होलिका दहन के लिए कुछ पूजन सामग्री जरूरी मानी जाती है. इसके लिए एक लोटा जल, गोबर के उपले, रोली, अक्षत, अगरबत्ती, फल, फूल, मिठाई, कलावा, बताशा, गुलाल पाउडर, नारियल, हल्दी की गांठ, मूंग दाल, और साबुत अनाज पूजा के लिए रखें.

होलिका दहन पर बन रहे शुभ ययोग
होलिका दहन के दिन आज कई शुभ योग बन रहे है. आज के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बन रहा है. सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 07:34 बजे से अगले दिन सुबह 06:19 बजे तक है. वहीं रवि योग सुबह 06:20 बजे से सुबह 07:34 बजे तक है.

हिंदू पंचांग के अनुसार, आज होलिका दहन के लिए लोगों के पास केवल 1 घंटा 20 मिनट का समय रहेगा. आज के दिन भद्रा की पूंछ शाम 06:33 बजे से शाम 07:53 बजे तक है, वहीं भद्रा का मुख शाम 07:53 बजे से रात 10:06 बजे तक है. होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 24 मार्च को रात 11:13 बजे से रात 12:27 बजे तक रहेगा.

होलिका दहन पर आज भद्रा का साया
आज होलिका दहन है. फाल्गुन पूर्णिमा की रात में होलिका दहन किया जाता है. आज होलिका पर भद्रा का साया रहेगा. 24 मार्च को आज भद्रा का साया सुबह 9 बजकर 24 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. इसलिए आज होलिका दहन रात 10 बजकर 27 मिनट के बाद ही किया जा सकेग
होलिक दहन पर क्या न करें
होलिका में कूड़ा न डालें, इस दिन काले रंग के वस्त्र न पहनें. होलिका दहन के दिन मास-मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें. इस दिन फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत करने वाले ब्रह्मचर्य का पालन करें. इस दिन तंत्र-मंत्र किए जाते हैं इसलिए कहीं भी रास्ते में पड़ी चीजों को हाथ न लगाएं.

राशि अनुसार होलिक दहन में डालें ये चीजें
मेष राशि – गुड़ की आहुति दें.
वृषभ राशि – चीनी की आहुति दें.
मिथुन राशि- कपूर की आहुति दें.
कर्क राशि – लोहबान की आहुति दें.
सिंह राशि – गेहूं की आहुति दें.
कन्या राशि – कपूर की आहुति दें.
तुला राशि – सफेद तिल की आहुति दें.
वृश्चिक राशि – नारियल की आहुति दें.
धनु राशि – जौ और चना की आहुति दें.
मकर राशि – काले तिल की आहुति दें
कुंभ राशि – काली सरसों की आहुति दें
मीन राशि – चना की आहुति दें.
होलिका दहन की अग्नि में क्या डालें
विवाह – शीघ्र विवाह के लिए होलिका की अग्नि में हवन सामग्री में घी मिलाकर डालें
दीर्धायु – लंबी आयु के लिए होलिका दहन में अपनी लंबाई बराबर काला धागा सिर से 7 बार घुमाकर अग्नि में डालें
घर में सुख – परिवार की सुख-शांति और तरक्की के लिए होलिका दहन की अग्नि में नारियल डालें

होलिका दहन पर भद्रा काल
शास्त्रों में होलिका दहन को लेकर कहा गया है कि ये पर्व भद्रा रहित पूर्णिमा की रात को मनाना उत्तम रहता है.फाल्गुन पूर्णिमा पर शाम के समय गोधूलि बेला में अगर भद्रा का प्रभाव हो तो होलिका दहन नहीं करना चाहिए, नहीं तो साधक सहित उसका परिवार संकट में आ जाता है. साल 2024 में होलिका दहन के समय भद्रा का साया नहीं है

भद्रा पूँछ – शाम 06.33 – रात 07.53

भद्रा मुख – रात 07.53 – रात 10.06

होली ला रही देश के लिए ये सौगात

इस बार होली पर ग्रह-नक्षत्रों शुभ स्थिति देश के लिए शुभ साबित होगी. होली के बाद से दीपावली तक बिजनेस करने वालों के लिए अच्छी स्थितियां, देश को आर्थिक रूप से लाभ होगा. विकास की योजनाओं को काम होंगे. देश में बीमारियों का संक्रमण कम होने लगेगा. रियल एस्टेट और स्टार्टअप्स तेसी से बढ़ेंगे

700 साल बाद 9 शुभ योग में होलिका दहन
24 मार्च 2024 को होलिका दहन पर 700 साल बाद 9 दुर्लभ योग का महासंयोग बन रहा है. इस दिन लक्ष्मी योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, पर्वत योग, उभयचरी, सरल, वरिष्ठ, शश महापुरुष योग और अमला योग रहे हैं. नवविवाहिता होली पर न करें ये काम
शादी के बाद पहली होली मायके में मनानी चाहिए. कहते हैं नई दुल्हन और सास को होलिका दहन एक साथ नहीं देखना चाहिए, इससे रिश्तों पर बुरा असर पड़ता है. नवविवाहिता को होली के दिन काले रंग के वस्त्र नहीं पहनना चाहिए.
: होलिका दहन के मंत्र
होलिका दहन का अनुष्ठान करते समय ये 5 मंत्र बोलना शुभ होता है.

  • ऊं प्रहलादाय नम:
  • ऊं नृसिंहाय नम:
  • ऊं होलिकाय नम:
  • अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः।अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्‌ ॥
  • अनेन अर्चनेन होलिकाधिष्ठातृदेवता प्रीयन्तां नमम्।
    : होलिक दहन की पूजा सामग्री
    होलिका दहन की पूजा सामग्री में बड़कुले, नारियल, गुलाल, घर की बनी गुजिया कच्चा सूती धागा, रोली, मौली, चंदन, हल्दी, कुमकुम, अक्षत, धूप, फूल, गाय के गोबर से बनी गुलरी, गेहूं की बालियां, बताशे, मिठाई, पूरियां, कलश, फल

गेहूं की बाली अग्नि में अर्पित करने से मां लक्ष्मी की कृपा अपने भक्तों पर सदैव बनी रहती है.

साथ ही घर में सुख-समृ्द्धि का वास होता है.

होलिका की अग्नि में 7 गेहूं की बालियों की आहुति देनी चाहिए.

7 गेहूं की बालियों को अपने ऊपर से 7 बार घुमा लें. इसके बाद इन्हें होलिका की पवित्र अग्नि में डाल दें.

गेहूं की बाली अग्नि में अर्पित करने से मां लक्ष्मी की कृपा अपने भक्तों पर सदैव बनी रहती है.

साथ ही घर में सुख-समृ्द्धि का वास होता है.

होलिका की अग्नि में 7 गेहूं की बालियों की आहुति देनी चाहिए.

7 गेहूं की बालियों को अपने ऊपर से 7 बार घुमा लें. इसके बाद इन्हें होलिका की पवित्र अग्नि में डाल दें.

होलिका दहन नजर के उपाय

होलिका दहन की राख को माथे पर लगाने से बुरी नज़र से छुटकारा मिलता है

ऑफिस घर दुकान की नजर उतार कर उसे होलिका में दहन करने से लाभ होता है.

होलिका दहन होगा शुभ योगों के बीच 24 मार्च को सुबह 6:20 बजे से सुबह 11:21 बजे तक रवि योग रहेगा, जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7:40 बजे से रात 12:35 बजे तक रहेगा. इसी दिन रात 8:34 बजे से वृद्धि योग शुरू होगा, जो अगली रात 9:30 बजे तक रहेगा.

होलिका दहन 2024 कपूर उपाय
होलिका दहन के दिन कपूर के उपाय से आपको मानसिक शांति मिलती और आपकी बहुत सी मुश्किलों का अंत होता है.

होलिका दहन के दिन कपूर के साथ गुलाब की पंखुडियों को भी जलाएं.

आपका स्वास्थ्य लंबे समय से खराब चल रहा है तो होलिका दहन के दिन नीम के 10 पत्ते, 6 लौंग और कपूर को अपने ऊपर से 5-7 बार फेंर कर होलिका की अग्नि में डाल दें.

होलिका दहन 2024 भद्रा कब?
होलिका दहन के दिन भद्रा काल भद्रा पूँछ – शाम 6:33 से 7:53 वहीं भद्रा मुख – शाम 7:53 से 10:06 रहेगी. इस दौरान कौई भी शुभ कार्य या पूजन ना करें.

होलिका दहन के दिन इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि होलिका दहन की पूजा के समय भद्रा काल ना हो. सभी शुभ कार्य भद्रा में करना वर्जित हैं.

होलिका दहन 2024 में 24 मार्च को किया जाएगा. इस दिन रात्रि के समय होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रात 11:13 से लेकर रात 00:27,तक रहेगा. इस दौरान पर होलिका दहन की पूजा कर सकते हैं.

होलिका दहन के दिन पूर्णिमा तिथि 24 मार्च, रविवार की सुबह 9.54 मिनट से लग जाएगी जो 25 मार्च, सोमवार की दोपहर 12.29 मिनट तक चलेगी.

होलिका दहन 2024
साल 2024 में रंगों का त्योहार होली 25 मार्च को मनाया जाएगा. होलिका दहन एक दिन पहले 24, मार्च, रविवार की रात में किया जाएगा. होलिका दहन के समय इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि भद्रा काल ना हो.

होली से पहले होलिका दहन किया जाता है. हिंदू धर्म में होलिका दहन का विशेष धार्मिक महत्व है. शास्त्रों में भी इसका उल्लेख मिलता है. परंपरा के अनुसार होलिका दहन के बाद ही होली का पर्व मनाया जाता है.

पंचांग (Panchang) के अनुसार होलिका दहन (Holika Dahan) इस साल 24 मार्च 2024 किया जाएगा. इस दिन शुभ मुहूर्त और अन्य जरूरी व महत्वपूर्ण बातें आइए जानते हैं-

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वर्ष 2024 में होलिका दहन के लिए एक घंटा 20 मिनट का ही समय रहेगा. जिस कारण 24 मार्च को भद्रा प्रातः 9:55 से आरंभ होकर मध्य रात्रि 11:13 तक भूमि लोक की रहेगी. इस बार होली पर भद्रा का साया रहेगा. इसलिए शुभ मुहूर्त का महत्व काफी बढ़ जाता है.

पंचांग की गणना के मुताबिक होलिका दहन भद्रा के पश्चात मध्य रात्रि 11:13 से मध्य रात्रि 12:33 के मध्य होगा. होलिका दहन के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बन रहा है.

सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 07:34 बजे से अगले दिन सुबह 06:19 बजे तक है. वहीं रवि योग रवि योग सुबह 06:20 बजे से सुबह 07:34 बजे तक है. रंग वाली होली से पहले पूर्णिमा के दिन ही होलिका दहन होगा. जो शास्त्र अनुसार उचित है.

पूर्णिमा तिथि कब लगेगी

पंचांग अनुसार पूर्णिमा तिथि 24 मार्च 2024 को सुबह 09:54 मिनट पर आरंभ होगी, वहीं 25 मार्च को दोपहर 12:29 मिनट पर समाप्त होगी.

होलिका दहन 2024 मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 24 मार्च को रात 11:13 से 00:27, मार्च 25 तक रहेगा. निर्णय सिंधु में बताया गया है कि भद्रा में रक्षाबंधन या रक्षा सूत्र नहीं बांधना चाहिए. इस बार होलिका पर भद्रा का समय भद्रा पूंछ -शाम 6:33 से 7:53 और भद्रा मुख- शाम 7:53 से 10:06 तक रहेगा.

होलिका की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार इसका संबंध होलिका और भक्त प्रह्लाद से है. प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक दैत्य था. जिसका जन्म महर्षि कश्यप के कुल में हुआ था. वह हिरण्यकरण वन का राजा था. हिरण्यकश्यप के पुत्र का नाम प्रह्लाद था और बहन का नाम होलिका था.

हिरण्यकश्यप को भगवान ब्रह्मा से विचित्र वरदान मिला था. इस वरदान के कारण भगवान विष्णु को मृत्यु लोक में अपना अवतार लेकर उसका वध करना पड़ा था. भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था.

हरिण्यकशिपु ने अपने ही पुत्र प्रह्लाद को अपनी बहन होलिका के द्वारा जीवित जला देना चाहा था. भगवान ने प्रह्लाद पर अपनी कृपा की और प्रह्लाद के लिए बनाई चिता में स्वयं होलिका जल गई.

तभी से इस दिन होलिका दहन मनानेकी परंपरा शुरू हई.हरिण्यकशिपु ने अपने ही पुत्र प्रह्लाद को अपनी बहन होलिका के द्वारा जीवित जला देना चाहा था. भगवान ने प्रह्लाद पर अपनी कृपा की और प्रह्लाद के लिए बनाई चिता में स्वयं होलिका जलकर मर गई. तभी से इस दिन होलिका दहन मनाने की परंपरा शुरू हई. होलिका दिन क्या किया जाता है, इस दिन का क्या महत्व है और क्या उपाय किए जाते हैं?

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